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Saturday, 14 October 2017

पिंक दुप्पट्टा

शौपिंग का अपना का फंडा सीधा है - मॉल में गए, दूकान में गए और 15-20 मिनट में जीन या शर्ट या जूते फाइनल कर दिए. पर श्रीमती के साथ ऐसा नहीं है. इस शॉप में देखो, उस शॉप में देखो. कलर देखो, कपड़ा देखो, टेक्सचर देखो, कीमत देखो और टीवी शो से स्टाइल देखो. इस वजह से महिलाओं का शौपिंग में टाइम ज्यादा लगता है. ये तो हमारे दोस्त नरूला जी का भी व्यक्तिगत अनुभव है कि श्रीमती के साथ जब शौपिंग करने जाते हैं तो शेव करके और परफ्यूम लगा कर जाते हैं. पर शौपिंग खत्म होते होते तक दाढ़ी बढ़ चुकी होती है और परफ्यूम ख़त्म हो चुकी होती है !
खैर घूमने निकले थे मेरठ की आबू लेन याने यहाँ के कनॉट प्लेस में. कई छोटी बड़ी दुकानों में नज़र मारते रहे. अचानक एक पिंक सूट पसंद आ गया. ट्राई कर लिया, पैक करा लिया और मैंने क्रेडिट कार्ड चला दिया.
- तो अब चलें ?
- अभी कहाँ चलें ? दुपट्टा भी तो लेना है. सदर में मिलेगा.
सदर की दो तीन दुकानों में से एक में सफ़ेद शिफोन का दुप्पट्टा पसंद आ गया, पैक करा लिया और मैंने क्रेडिट कार्ड चला दिया.
- तो अब चलें ?
- अभी कहाँ चलें ? कलर भी तो कराना है. आगे चौक में रंग वाले बैठते हैं वहां चलते हैं चलो.
रंगरेजवा ने थोड़े नखरे दिखाए पर फिर आधे घंटे में कर ही दिया. कैश देकर मैंने पूछा,
- तो अब चलें ?
- अभी कहाँ चलें ? अभी तो पीको करानी है. चूड़ी बाज़ार चलो.
पीको हो गई और मैंने पैसे देकर पूछा,
- तो अब चलें ?
- अभी कहाँ चलें ? आबू लेन की चाट नहीं खिलाओगे ?

तब तक रंगरेज की कारवाई देखिये :
भैया ये दुप्पट्टा कलर करना है? - कर देंगे जी. कितनी देर लगेगी ? - कल ले जाना. - नहीं भैया नहीं हमें तो अभी दिल्ली वापिस जाना है. जल्दी कर दो  - आधा घंटा तो लगी जाता है. - ठीक है हम वेट कर लेते हैं  

एक चम्मच रंग डाला बाल्टी में थोड़ा गरम पानी डाला और सफ़ेद दुपट्टा डुबो दिया 

अब दुप्पट्टे को उबलते पानी में  डाल दिया और डंडे से हिलाया पर लगता है रंग अभी नहीं मिला 

कुछ और 'मसाला' डाल कर दुप्पट्टा घुमाया. अब मिला कर देखा. हाँ अब रंग टैली हो गया. ओके है जी ओके  

रंगाई और फिर सुखाई बस निपट गया मामला